मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रदेश के सफाई कर्मचारियों की बदहाल स्थिति, कम वेतन, असुरक्षित रोजगार और नियमितीकरण की मांगों को लेकर आज भोपाल में प्रेस वार्ता कर भाजपा सरकार पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान का श्रेय लेने वाली सरकार शहरों को स्वच्छ रखने वाले कर्मचारियों को सम्मानजनक वेतन, स्थायी रोजगार और सुरक्षा देने में विफल रही है। प्रदेश में सफाई कर्मचारी अपने अधिकारों के लिए आंदोलन कर रहे हैं, वहीं सीवर सफाई के दौरान लगातार हो रही मौतें सरकार की संवेदनहीनता उजागर करती हैं।
सिंघार ने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर सफाई कर्मचारियों की मांगों का जल्द निराकरण करने की मांग भी की है।
1. स्वच्छ भारत के दावे, लेकिन सफाई कर्मचारियों के अधिकार कहां हैं?
प्रदेश को स्वच्छ रखने वाले कर्मचारी आज अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर संघर्ष कर रहे हैं। 3 नवंबर को भोपाल में प्रदर्शन के बाद 4 नवंबर से प्रदेशव्यापी कामबंद हड़ताल की घोषणा की गई।
भाजपा सरकार स्वच्छता रैंकिंग और पुरस्कारों का श्रेय लेती है, लेकिन सफाई कर्मचारियों के भविष्य की गारंटी नहीं देती। स्वच्छता का श्रेय सरकार को और शोषण, कम वेतन तथा असुरक्षित रोजगार कर्मचारियों को क्यों?
2. चार प्रमुख मांगें - सरकार कब देगी सफाई कर्मचारियों को उनका हक?
वर्षों से कार्यरत दैनिक वेतनभोगी एवं विनियमित कर्मचारियों को नियमित कर सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में सफाई कर्मचारियों के लिए न्यूनतम ₹25,000 मासिक वेतन सुनिश्चित हो।
ठेकेदारी और आउटसोर्सिंग व्यवस्था खत्म कर स्थायी एवं सुरक्षित रोजगार दिया जाए।
सेवाकाल में मृत्यु होने पर मृत कर्मचारी के परिवार के एक पात्र सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति मिले।
3. 29 दिन की मेहनत, सिर्फ ₹9 हजार वेतन - परिवार कैसे चलेगा?
भोपाल में सफाई कर्मचारियों को 29 दिन काम करने के बाद लगभग ₹9,000 वेतन मिलता है। अन्य नगरीय निकायों में कहीं ₹7,000 तो कहीं मात्र ₹6,000 दिए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री बताएं कि इतनी महंगाई में कर्मचारी घर का किराया, राशन, बच्चों की फीस और परिवार का इलाज कैसे कराए?
4. प्रयागराज में पैर धोकर सम्मान, मध्यप्रदेश में अधिकारों के लिए संघर्ष!
अनुमान के अनुसार प्रदेश में वाल्मीकि समाज की आबादी 7 लाख से अधिक है और लगभग 4 लाख लोग सफाई कार्य से जुड़े हैं।
वर्ष 2019 के प्रयागराज कुंभ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सफाई कर्मचारियों के पैर धोकर सम्मान का संदेश दिया था। लेकिन आज वही समाज अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर संघर्ष कर रहा है। क्या यही भाजपा का सामाजिक न्याय है?
5. पांच घटनाएं, 8 मौतें और 4 घायल - कर्मचारियों की सुरक्षा कौन सुनिश्चित करेगा?
जून 2023 से जुलाई 2026 के बीच ग्वालियर, रीवा, सतना, इंदौर और उज्जैन में सीवर सफाई के दौरान 8 लोगों की मौत हुई और 4 घायल हुए। उज्जैन में एक की मौत और दो लोग गंभीर रूप से घायल हुए।
मुख्यमंत्री के गृह जिले में भी सफाई कर्मचारी सुरक्षित नहीं हैं। सरकार बताए कि सीवर सफाई के दौरान कर्मचारियों की जान बचाने के लिए क्या ठोस व्यवस्था की गई है?
6. कानून मौजूद, फिर भी जवाबदेही क्यों नहीं?
मैनुअल स्कैवेंजिंग अधिनियम, 2013 की धारा 7 सुरक्षा उपायों के बिना खतरनाक तरीके से सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के लिए लोगों को नियोजित करने पर रोक लगाती है। धारा 9 में उल्लंघन पर दंड का प्रावधान है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार सीवर सफाई के दौरान मृत्यु होने पर ₹30 लाख मुआवजे का प्रावधान है। सरकार बताए कि कितने परिवारों को मुआवजा मिला और कितने प्रकरण लंबित हैं?
7. कर्मचारियों के नियमितीकरण की नीति बनाने के बजाय हाईकोर्ट में लड़ रही सरकार!
25 मार्च 2025 को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने वर्षों से कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए व्यापक नीति बनाने का निर्देश दिया था (WP 18866/2024) ।
21 सितंबर 2026 को हाईकोर्ट की युगलपीठ ने सरकार की अपील खारिज कर नीति दोबारा तैयार करने का निर्देश बरकरार रखा। कर्मचारियों को सुरक्षा देने के बजाय सरकार अदालत में उनके अधिकारों का विरोध क्यों कर रही है?
सरकार से सवाल
वर्षों से सेवा दे रहे सफाई कर्मचारियों को नियमित करने की समयसीमा सरकार कब घोषित करेगी?
प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में ₹25,000 न्यूनतम मासिक वेतन कब लागू होगा?
शोषण का माध्यम बन चुकी ठेका एवं आउटसोर्स व्यवस्था कब समाप्त होगी?
सेवाकाल में मृत कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति कब दी जाएगी?
जो कर्मचारी पूरे शहर को स्वच्छ रखते हैं, भाजपा सरकार उनके जीवन से गरीबी, शोषण और असुरक्षा कब दूर करेगी? सफाई कर्मचारियों को उनका अधिकार, सम्मानजनक वेतन और सुरक्षित भविष्य मिलना चाहिए।







