दो दिवसीय कॉन्क्लेव में उद्योग जगत के नेतृत्वकर्ताओं, पेशेवरों, संकाय सदस्यों और विद्यार्थियों ने एआई को अपनाने से टिकाऊ व्यावसायिक बढ़त तक की यात्रा पर किया विचार-विमर्श
मंडी: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मंडी (आईआईटी मंडी) के स्कूल ऑफ मैनेजमेंट ने अपने प्रमुख एआई एवं नेतृत्व कॉन्क्लेव AiXcelrate 4.0 के चौथे संस्करण का सफलतापूर्वक समापन किया। दो दिवसीय कार्यक्रम में उद्योग जगत के नेतृत्वकर्ताओं, विषय विशेषज्ञों, पेशेवरों, संकाय सदस्यों और विद्यार्थियों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, नेतृत्व और व्यावसायिक मूल्य के बदलते संबंधों पर व्यापक चर्चा की।
19–20 सितंबर 2026 को आईआईटी मंडी परिसर में आयोजित इस कॉन्क्लेव का विषय “Next Gen AI-Leadership: Beyond the Horizon to Monetizing AI” था। कार्यक्रम में समकालीन एआई अपनाने की प्रक्रिया से जुड़े तीन परस्पर संबंधित बदलावों पर ध्यान केंद्रित किया गया: उत्पादकता और स्वचालन से रणनीतिक बढ़त की ओर बढ़ना, एआई अपनाने को तीव्र व्यावसायिक विकास में बदलना, तथा एआई पहलों को पायलट परियोजनाओं से टिकाऊ और लाभप्रद स्तर तक ले जाना।
इन बदलावों के व्यापक महत्व पर विचार रखते हुए प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा, निदेशक, आईआईटी मंडी ने एआई नेतृत्व के केंद्र में जिम्मेदारी और सामाजिक प्रभाव को रखने की आवश्यकता पर बल दिया।
“जैसे-जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता संगठनों और समाज में अधिक गहराई से समाहित हो रही है, नेतृत्व को केवल इस आधार पर परिभाषित नहीं किया जा सकता कि हम नई तकनीकों को कितनी तेजी से अपनाते हैं। जिम्मेदार एआई नेतृत्व के लिए यह आवश्यक है कि हम अपने निर्णयों के व्यापक सामाजिक परिणामों पर विचार करें और साथ ही यह सुनिश्चित करें कि नवाचार मानवीय मूल्यों और सार्थक परिणामों के अनुरूप रहे। आईआईटी मंडी जैसे संस्थानों की ऐसी नेतृत्व क्षमता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका है, जो तकनीकी दक्षता को जिम्मेदारी और सामाजिक उद्देश्य के साथ जोड़ सके।”
स्वचालन से रणनीतिक बढ़त की ओर
पहले दिन “Moving from Productivity and Automation to Strategic Advantage: The AI Value Shift” विषय पर पैनल चर्चा आयोजित की गई। इसमें इस प्रश्न पर विचार किया गया कि क्या दक्षता और स्वचालन से प्राप्त लाभ टिकाऊ प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त पैदा करने के लिए पर्याप्त हैं, और संगठन एआई के अधिक रणनीतिक उपयोग की दिशा में कैसे बढ़ सकते हैं।
चर्चा के दौरान Hindustan Coca-Cola के Chief Data Officer Ashley D’Acouza ने इस धारणा के प्रति सावधान किया कि एआई तक व्यापक पहुंच अपने आप प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त में बदल जाती है। उन्होंने कहा, “एआई से मिलने वाली वास्तविक बढ़त अभी दूर है। हम अभी भी प्रयोग के चरण में हैं।” उन्होंने जोर दिया कि परिणाम काफी हद तक नेतृत्व, रणनीतिक दृष्टि और उपलब्ध तकनीकों को संगठन की विशिष्ट व्यावसायिक आवश्यकताओं से जोड़ने की क्षमता पर निर्भर करेंगे। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि तकनीकी क्षमताएँ वर्तमान में उद्योग में उनके व्यापक उपयोग की तुलना में अधिक तेजी से विकसित हो रही हैं।
पहले दिन मेंटरिंग सत्र और उद्योग-अकादमिक विचार-मंथन सत्र भी आयोजित किए गए, जिनसे विद्यार्थियों को उद्योग विशेषज्ञों के साथ सीधे संवाद करने और उभरती प्रबंधकीय चुनौतियों पर विचार करने का अवसर मिला। शाम का समापन HimTarang – Cultural Evening के साथ हुआ, जिसमें आईआईटी मंडी समुदाय के सदस्यों ने विविध सांस्कृतिक और रचनात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से भाग लिया और कॉन्क्लेव को एक उत्सवपूर्ण आयाम प्रदान किया।
एआई अपनाने से विकास और पायलट से लाभप्रद विस्तार तक
दूसरे दिन दो पैनल चर्चाओं के माध्यम से संगठनात्मक एआई परिपक्वता के अगले चरणों पर विमर्श को आगे बढ़ाया गया।
“Moving from AI Adoption to AI Advantage: Accelerating Growth” विषय पर आयोजित पैनल में इस बात पर चर्चा की गई कि संगठन बढ़ते एआई उपयोग को ग्राहक अधिग्रहण, वैयक्तिकरण, नवाचार, बेहतर निर्णय-निर्माण और राजस्व वृद्धि जैसे ठोस व्यावसायिक परिणामों से कैसे जोड़ सकते हैं। चर्चा में ऐसे विश्वसनीय मानकों की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया, जो तकनीकी प्रयोग और वास्तविक व्यावसायिक मूल्य के बीच स्पष्ट अंतर कर सकें।
दूसरे पैनल के दौरान Rohit Kilam, Chief Technology Officer, HDFC Life ने मनुष्यों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बीच बदलते कार्य-विभाजन पर विचार रखते हुए कहा कि एआई संभवतः उन कार्यों का बड़ा हिस्सा संभाल लेगी जिन्हें आसानी से सत्यापित किया जा सकता है, जबकि अस्पष्टता और असत्यापनीयता वाले क्षेत्रों में मानवीय विवेक की आवश्यकता बनी रहेगी। उन्होंने कहा, “जो सत्यापित किया जा सकता है, उसे एआई तेजी से अपने हाथ में लेगी, लेकिन जो सत्यापित नहीं किया जा सकता, वह बना रहेगा। यहीं मनुष्य प्रासंगिक बने रहेंगे।” उन्होंने जोर दिया कि संगठनों को निर्णय, व्याख्या और विवेक जैसी विशिष्ट मानवीय क्षमताओं को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए, जिन्हें एआई केवल स्वचालित नहीं कर सकती।
इसके बाद आयोजित “Moving from Pilot to Profit: Scaling AI” पैनल ने सफल एआई प्रयोगों को पूरे संगठन में लागू करने की चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित किया। चर्चा में डेटा अवसंरचना, मौजूदा प्रणालियों के साथ एकीकरण, गवर्नेंस, कार्यबल की तैयारी, लागत, मानवीय निगरानी तथा यह आकलन शामिल था कि किन एआई पहलों में बड़े स्तर पर टिकाऊ प्रतिफल देने की क्षमता है।
इंडस्ट्री चैलेंज ने एआई-आधारित सोच को कक्षा से जोड़ा
AiXcelrate 4.0 का एक महत्वपूर्ण हिस्सा Industry Case Competition था, जिसे 6D Technologies द्वारा प्रायोजित और समर्थित किया गया। इस प्रतियोगिता ने एमबीए और इंटीग्रेटेड एमबीए विद्यार्थियों को उद्योग से जुड़ी वास्तविक व्यावसायिक चुनौती पर काम करने का अवसर दिया। टीमों को समस्या का विश्लेषण करने, सिफारिशें तैयार करने और निर्णायक मंडल के समक्ष अपने समाधान प्रस्तुत करने थे, जिससे रणनीतिक सोच, विश्लेषणात्मक क्षमता और नवाचार को एक मंच पर लाया गया।
प्रतियोगिता में चार से पांच विद्यार्थियों की टीमों ने एक साझा उद्योग चुनौती पर काम किया और उद्योग प्रतिनिधियों सहित निर्णायक मंडल के समक्ष अपनी सिफारिशों का प्रस्तुतिकरण किया।
Team Tactical Minds ने AiXcelrate 4.0 Industry Case Competition में विजेता स्थान प्राप्त किया, जबकि The Case Solvers और The InsightX ने क्रमशः प्रथम और द्वितीय उपविजेता स्थान हासिल किए।
कार्यक्रम के पर प्रो. अंजन के. स्वैन, अध्यक्ष, स्कूल ऑफ मैनेजमेंट, आईआईटी मंडी ने एआई और व्यवसाय के उभरते संबंधों को समझने के लिए तीन ‘S’ — scope, speed और scale — के महत्व को रेखांकित किया।
“एआई के व्यावसायिक प्रभाव को अब तीन आयामों — scope, speed और scale — के माध्यम से समझना आवश्यक है। इसका scope संगठन के विभिन्न कार्यों में लगातार विस्तार कर रहा है, तकनीकी परिवर्तन की speed तेजी से बढ़ रही है, और संगठन इस चुनौती का सामना कर रहे हैं कि एआई को ऐसे scale पर कैसे ले जाया जाए जहाँ वह वास्तविक व्यावसायिक मूल्य उत्पन्न कर सके। AiXcelrate प्रबंधन शिक्षा को उद्योग की वास्तविक कार्यप्रणाली से जोड़कर इन प्रश्नों की गंभीर पड़ताल के लिए एक मंच उपलब्ध कराता है।”
कॉन्क्लेव में विद्यार्थी प्रस्तुतियाँ और मेंटरिंग संवाद भी शामिल रहे, जिसके बाद समापन सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम को इस प्रकार तैयार किया गया था कि एआई को केवल तकनीकी विषय के रूप में देखने के बजाय उद्योग के अनुभव और प्रबंधन शिक्षा के बीच सतत संवाद स्थापित हो सके। दो दिनों के दौरान पैनल चर्चाएँ, मेंटरिंग, विद्यार्थी सहभागिता और उद्योग-अकादमिक संवाद कार्यक्रम के प्रमुख हिस्से रहे।
धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए Dr. Ashish Bollimbala, Faculty Coordinator, AiXcelrate 4.0 ने उद्योग वक्ताओं और पैनल सदस्यों, सहभागी संगठनों, 6D Technologies, विद्यार्थियों, संकाय सहयोगियों और आयोजन टीम के सदस्यों को कॉन्क्लेव में उनके योगदान के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने प्रबंधन और नेतृत्व के भविष्य से जुड़े तेजी से महत्वपूर्ण होते प्रश्नों पर उद्योग और अकादमिक जगत को एक साथ लाने में किए गए सामूहिक प्रयास की सराहना की।
रणनीतिक मूल्य, जिम्मेदार नेतृत्व और एआई को बड़े स्तर पर लागू करने की संगठनात्मक वास्तविकताओं पर जोर देते हुए AiXcelrate 4.0 इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का अगला चरण केवल तकनीकी क्षमताओं से नहीं, बल्कि उसके अपनाने और उपयोग से जुड़े प्रबंधकीय एवं नेतृत्व संबंधी निर्णयों की गुणवत्ता से निर्धारित होगा।







