15 अक्टूबर से UPI पेमेंट पर नया नियम
यूपीआई से डिजिटल लेनदेन करने वालों के लिए 15 अक्टूबर से एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है. अब 2 हजार रुपये से ज्यादा के चुनिंदा मर्चेंट पेमेंट्स पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर (MDR) यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू होगा. हालांकि सरकार ने साफ किया है कि यह चार्ज ग्राहकों से सीधे नहीं लिया जाएगा. इसके अलावा 2 हजार रुपये तक की खरीदारी और एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बीच होने वाले सामान्य ट्रांसफर पर कोई शुल्क नहीं लगेगा. सरकार के मुताबिक देश के करीब 96 फीसदी व्यापारी इस चार्ज के दायरे से पूरी तरह बाहर रहेंगे.
Gen Z और युवाओं की आदतों पर पड़ सकता है असर
इस फैसले का सबसे ज्यादा असर युवाओं और खासकर Gen Z पर देखने को मिल सकता है. इस पीढ़ी के लिए जेब में कैश रखने के बजाय सिर्फ फोन निकालकर क्यूआर कोड स्कैन करना रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है. अगर दुकानदार इस अतिरिक्त लागत का बोझ किसी न किसी तरह ग्राहकों पर डालते हैं, तो बड़े पेमेंट्स के वक्त युवा यूपीआई के बजाय कैश या कार्ड इस्तेमाल करने का विकल्प चुन सकते हैं.
लोकलसर्किल्स द्वारा 31 हजार से ज्यादा यूपीआई यूज़र्स पर किए गए एक सर्वे में दिलचस्प बातें सामने आई हैं. जब लोगों से पूछा गया कि 2 हजार से ज्यादा के पेमेंट पर अतिरिक्त चार्ज लगने की स्थिति में वे क्या करेंगे, तो 27 फीसदी ने कैश और 26 फीसदी ने क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करने की बात कही. वहीं 13 फीसदी ने डेबिट कार्ड और 11 फीसदी ने बैंक ट्रांसफर चुनने का सुझाव दिया, जबकि सिर्फ 14 फीसदी लोग ही चार्ज देकर भी यूपीआई इस्तेमाल करने के पक्ष में थे.
बड़े पेमेंट्स के लिए फिर अपनाना पड़ सकता है कैश और कार्ड
छोटी-मोटी खरीदारी या दोस्तों के साथ बिल शेयर करने जैसे कामों के लिए यूपीआई का दबदबा बरकरार रहेगा. लेकिन मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े, होटल या अस्पताल जैसे बड़े खर्चों में यह देखना अहम होगा कि व्यापारी इस लागत को कैसे संभालते हैं. अगर मर्चेंट खुद यह खर्च उठाता है तो आम ग्राहक को कोई फर्क महसूस नहीं होगा. लेकिन अगर पेमेंट के वक्त कोई अलग शर्त सामने आती है, तो लोगों को एक बार फिर जेब में कैश रखने या कार्ड साथ लेकर चलने की आदत डालनी पड़ सकती है.







